Anjana Om Kashyap Instagram – बनारस में मां गंगा ही नही, जीवन की गंगा बहती है
बनारस वक्त के साथ चलकर भी रुका हुआ है अध्यात्म में
बनारस जीने का नाम है, अपने भीतर उतरने का मार्ग है
बनारस को उसके घाटों पर, गलियों में अलसाते देख मन ठहर जाता है
बनारसी साड़ी से हर दुल्हन को काशी सजाती है
बनारस में सब गुरु, केहू नाहीं चेला’
बनारस में चाय की चुस्कियों के बीच ज्ञान की गंगा बहती
हैं
बनारस और बनारसी किसी भी परिभाषा से परे है
बनारस वह समंदर है जहां मोती वाली सीप खुद डूबने पर ही मिलेगी
काशी में जीवन और मृत्यु साथ चलते हैं
बनारस दिल में तो आता है पर समझ में नहीं आता
इतना अनछुआ कि छू नहीं सकते, बस गंगा जल की तरह अंजुलि में भर सकते हैं
वाराणसी बाबा विश्वनाथ की धरती है
उनके त्रिशूल पर टिकी …
यह मंदिरों का शहर है, भारत की धार्मिक राजधानी है
दीपों की नगरी, ज्ञान की नगरी और घाटो की नगरी
यह अविनाशी काशी है
प्रसिद्ध अमेरिकी लेखक Mark Twain लिखते हैं – बनारस इतिहास से भी पुरातन है, परंपराओं से पुराना है, किंवदंतियों (लीजेन्ड्स) से भी प्राचीन है और जब इन सबको एकत्र कर दें, तो उस संग्रह से भी दोगुना प्राचीन है।”
हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत का बनारस घराना वाराणसी की ही देन है
भारत के कई दार्शनिक, कवि, लेखक, संगीतज्ञ वाराणसी में रहे हैं
कबीर, वल्लभाचार्य, रविदास, स्वामी रामानंद, त्रैलंग स्वामी, शिवानन्द गोस्वामी, मुंशी प्रेमचंद, जयशंकर प्रसाद, आचार्य रामचंद्र शुक्ल, पंडित रवि शंकर, गिरिजा देवी, पंडित हरि प्रसाद चौरसिया और उस्ताद बिस्मिल्लाह खां
गोस्वामी तुलसीदास ने हिन्दू धर्म का परम-पूज्य ग्रंथ रामचरितमानस यहीं लिखा था
गौतम बुद्ध ने अपना प्रथम प्रवचन यहीं निकट ही सारनाथ में दिया था🙏🏼 | Posted on 28/May/2024 23:06:22



