Vidushi Malpani Instagram – सूरज की उंगलियाँ
जब धरा के आँचल में उलझती हैं,
गेहूं की पकी बालियों भरे खेतों में
फिर सोने की चमक बिखरती है।
पकते आमों की खुशबु
हवा में गीत रचती है,
और नीम की छाँव तले
दोपहरें उनींदी हो जाती हैं।
नंगे पाँव भागते बच्चे,
हाथों में बर्फ का गोला मिठास घोलता है,
गर्म लू के थपेड़ों में भी
हँसी का महकता गुलाल उड़ता है।
साँझ ढले जब थककर
दिन करवट बदलता है,
तो जुगनू किसी गुप्त संदेश की तरह
रात की हथेलियों पर चमकता हैं।
ग्रीष्म…
एक अल्हड़ गीत की तरह है,
जो तपिश में भी
ज़िंदगी का रस घोल देता है।
– विदुषी मालपानी “वीणा”
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