Vidushi Malpani Instagram – वो गुलाब,
जो तुमने उस रोज़
किताब में रख दिया था
“याद के लिए।”
वो सूख गया है अब,
पर उसकी पंखुड़ियाँ
अब भी तुम्हारे स्पर्श से महकती हैं।
वो लाल रंग
अब हलका भूरा हो गया है
जैसे प्रेम ने उम्र ओढ़ ली हो।
मैंने कई बार
उस किताब को खोला है,
शब्द पढ़ने नहीं,
तुम्हें छूने।
हर बार
वो गुलाब कहता है
कुछ चीज़ें
ख़त्म होकर भी हमेशा
ख़ूबसूरत ही रहती हैं।
लेखिका एवं कॉपीराइट
विदुषी मालपानी “वीणा ”
खण्डवा, मध्यप्रदेश | Posted on 23/Aug/2025 04:58:24



