Priyanka Pandit Instagram – Bhagavad Gita: Chapter 3, Verse 41
तस्मात्त्वमिन्द्रियाण्यादौ नियम्य भरतर्षभ।
पाप्मानं प्रजहि ह्येनं ज्ञानविज्ञाननाशनम्
इसलिए हे भरतवंशियों में श्रेष्ठ! प्रारम्भ से ही इन इन्द्रियों को नियंत्रण में रखकर कामना रूपी शत्रु का वध कर डालो जो पाप का मूर्तरूप तथा ज्ञान और आत्मबोध का विनाशक है।
इस श्लोक में अब श्रीकृष्ण यह स्पष्ट कर रहे हैं कि उस काम वासना पर कैसे विजय प्राप्त की जा सकती है जो सभी बुराइयों की जड़ है और मानव चेतना के लिए घातक है। काम वासना को बुराइयों का भण्डार बताते हुए श्रीकृष्ण अर्जुन को प्रारम्भ से ही इन्द्रियों के विषय भोगों पर नियंत्रण रखने के लिए कहते हैं। इनकी उत्पत्ति की अनुमति देना हमारे कष्टों का मूल कारण है
जबकि इनका दमन करना शांति का मार्ग है। | Posted on 11/Jun/2024 20:09:24
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