Priyanka Pandit Instagram – Bhagavad Gita: Chapter 3, Verse 39
आवृतं ज्ञानमेतेन ज्ञानिनो नित्यवैरिणा ।
कामरूपेण कौन्तेय दुष्पूरेणानलेन च
हे कुन्ती पुत्र! इस प्रकार ज्ञानी पुरुष का ज्ञान भी अतृप्त कामना रूपी नित्य शत्रु से आच्छादित रहता है जो कभी संतुष्ट नहीं होता और अग्नि के समान जलता रहता है।
यहाँ श्रीकृष्ण ने काम या वासना की हानिकारक प्रकृति को और अधिक सुस्पष्ट किया है। काम का अर्थ ‘इच्छा’, दुष्प्रेरणा का अर्थ ‘अतृप्ति’ और अनलेन का अर्थ ‘अग्नि के समान’ है। कामनाएँ बुद्धिमान पुरूष के विवेक पर विजय पा लेती हैं और इनकी तुष्टि के लिए उन्हें लुभाती है। कामना रूपी अग्नि को शमन करने का जितना भी अधिक प्रयास किया जाए यह उतनी ही और अधिक भीषणता से भड़कती है। | Posted on 09/Jun/2024 13:05:21
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